नीलकंठ जहां भगवान शिव ने किया था विष पान।
यमकेश्वर।
पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर के मणिकूट पर्वत पर स्थित मधुमती और पंकजा नदी के संगम पर स्थित इस मंदिर के दर्शन करने के लिए सावन मास में हर वर्ष विभिन्न राज्यों से लाखों शिवभक्त कांवड़ में गंगाजल लेकर जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
इस मंदिर को लेकर पौराणिक कथा है कि समुद्र मंथन से निकली चीजें देवताओं और असुरों में बंटती गईं लेकिन तभी हलाहल नाम का विष निकला। इसे न तो देवता चाहते थे और ना ही असुर। यह विष इतना खतरनाक था कि संपूर्ण सृष्टि का विनाश कर सकता था। इस विष की अग्नि से दसों दिशाएं जलने लगी थीं, जिससे संसार में हाहाकार मच गया। तभी भगवान शिव ने पूरे ब्रह्मांड को बचाने के लिए विष का पान किया। जब भगवान शिव विष का पान कर रहे थे, तब माता पार्वती उनके पीछे ही थीं और उन्होंने उनका गला पकड़ लिया, जिससे विष न तो गले से बाहर निकला और न ही शरीर के अंदर गया।
विष पीने के बाद वृक्ष के नीचे समाधि में लीन हो गए महादेव।
विष भगवान शिव के गले में ही अटक गया, जिसकी वजह से उनका गला नीला पड़ गया और फिर महादेव नीलकंठ कहलाएं। लेकिन विष की उष्णता (गर्मी) से बेचैन भगवान शिव शीतलता की खोज में हिमालय की तरफ बढ़ चले गए और वह मणिकूट पर्वत पर पंकजा और मधुमती नदी की शीतलता को देखते हुए नदियों के संगम पर एक वृक्ष के नीचे बैठ गए थे। जहां वह समाधि में पूरी तरह लीन हो गए और वर्षों तक समाधि में ही रहे, जिससे माता पार्वती परेशान हो गईं।
माता पार्वती भी इसी पर्वत पर बैठकर भगवान शिव की समाधि का इंतजार करने लगीं। लेकिन कई वर्षों बाद भी भगवान शिव समाधि में लीन ही रहे। देवी-देवताओं की प्रार्थना करने के बाद भोलेनाथ ने आंख खोली और कैलाश पर जाने से पहले इस जगह को नीलकंठ महादेव का नाम दिया। इसी वजह से आज भी इस स्थान को नीलकंठ महादेव के नाम से जाना जाता है। जिस वृक्ष के नीचे भगवान शिव समाधि में लीन थे, आज उस जगह पर एक विशालकाय मंदिर है और हर साल लाखों की संख्या में शिव भक्त इस मंदिर के दर्शन करने के लिए आते हैं।

रक्तदान से स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ता है: प्रो.उनियाल
‘आपातकाल के 50 वर्ष: भारतीय लोकतंत्र के लिए सीख’ विषय पर युवा संसद का आयोजन।
राष्ट्रीय सेवा योजना के द्वितीय दिवस पर योग, स्वच्छता एवं मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
राष्ट्रीय सेवा योजना भारत माता की सेवा करने का एक आदर्श मंच: देवेंद्र भसीन
इंडोर खेल प्रतियोगिताओं एवं भव्य पुरस्कार वितरण समारोह के साथ क्रीड़ा प्रतियोगिताएं संपन्न
वार्षिक क्रीडा प्रतियोगिता एवं मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति सामान समारोह का भव्य आयोजन