उद्यमिता आज के युवाओं के लिए रोजगार के साथ आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम: प्रो. विनोद अग्रवाल
देहरादून, 3 सितंबर।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मालदेवता (रायपुर), देहरादून में आज एक दिवसीय उद्यमिता बूट कैंप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर विनोद प्रकाश अग्रवाल ने की। इस अवसर पर उन्होंने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में उद्यमिता केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, आत्मनिर्भरता और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है।
प्राचार्य प्रो. अग्रवाल ने कहा कि आज के युवा पारंपरिक रोजगार के विकल्पों तक सीमित न रहकर अपनी रचनात्मकता, कौशल और नवाचार को व्यवसायिक अवसरों में परिवर्तित करें। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने आसपास की समस्याओं और स्थानीय संसाधनों को पहचानकर ऐसे बिजनेस आइडिया विकसित करें, जो समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकें। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा युवाओं को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनका विद्यार्थियों को अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए।
कार्यक्रम में देवभूमि उद्यमिता केंद्र, देहरादून की जिला संयोजक सपना चौहान ने छात्र-छात्राओं को देवभूमि उद्यमिता योजना तथा भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII), अहमदाबाद के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने उद्यमिता की संभावनाओं, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन तथा व्यवसायिक विचारों को सफल उद्यम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया के बारे में विद्यार्थियों को अवगत कराया।
इस अवसर पर छात्र-छात्राओं से उनके बिजनेस आइडिया एकत्रित किए गए। प्राप्त विचारों की जांच एवं मूल्यांकन के बाद योग्य विद्यार्थियों का चयन आगामी तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के लिए किया जाएगा।
बूट कैंप में महाविद्यालय के लगभग 60 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विनोद शाह ने किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय की उद्यमिता योजना के संयोजक डॉ. सत्येंद्र कुमार, सदस्य डॉ. धर्मेंद्र राठौर, डॉ. शिव पुरोहित, डॉ. ममता भट्ट, डॉ. आशा रोंगली, तथा प्राध्यापक डॉ. सुमन गुसाईं, डॉ. कविता काला, डॉ. राम, डॉ. विजेंद्र लिंगवाल सहित अन्य प्राध्यापक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में अभय उनियाल एवं रोहित का विशेष योगदान रहा।

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