श्री बदरीनाथ–केदारनाथ के शीतकालीन पूजा स्थलों में उमड़ा आस्था का सैलाब।

अब तक 3567 श्रद्धालुओं ने किए दर्शन: बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी।
देहरादून 8 दिसंबर।
श्री बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष श्री हेमंत द्विवेदी ने जानकारी दी कि धामों के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने के पश्चात पारंपरिक रूप से संचालित होने वाली शीतकालीन पूजा में श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक श्री बदरीनाथ एवं श्री केदारनाथ धाम के शीतकालीन पूजा स्थलों में कुल 3567 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, और आने वाले दिनों में यह संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है।
बीकेटीसी अध्यक्ष ने आज सोमवार को बताया कि श्री केदारनाथ धाम एवं श्री मदमहेश्वर जी की शीतकालीन गद्दीस्थली श्री ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ में अब तक 3215 श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर चुके हैं। वहीं श्री बदरीनाथ धाम की शीतकालीन पूजा स्थली योग बदरी, पांडुकेश्वर में 57 श्रद्धालुओं तथा श्री नृसिंह मंदिर, ज्योतिर्मठ में 257 श्रद्धालुओं ने दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त किया है। श्रद्धालु यहां पहुंचकर अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति और शांति का अनुभव कर रहे हैं।
श्री द्विवेदी ने बताया कि इस वर्ष शीतकालीन यात्रा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। 30 नवंबर को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम में उत्तराखंड के शीतकालीन पूजा स्थलों का उल्लेख किए जाने के बाद देश-विदेश से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। साथ ही मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में शीतकालीन यात्रा को राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान केदारनाथ की शीतकालीन गद्दीस्थली श्री ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ, श्री नृसिंह मंदिर, ज्योतिर्मठ, योग बदरी, पांडुकेश्वर सहित अन्य अधीनस्थ मंदिरों में दर्शन हेतु पहुंचेंगे।
बीकेटीसी अध्यक्ष ने कहा कि मंदिर समिति एवं जिला प्रशासन द्वारा तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उखीमठ, ज्योतिर्मठ तथा पांडुकेश्वर में यात्रा मार्गों, आवास, स्वास्थ्य सुविधा, सुरक्षा, पूजा-अर्चना और स्वच्छता को लेकर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। साथ ही उन्होंने स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों एवं तीर्थ पुरोहितों से भी शीतकालीन यात्रा को सफल बनाने में सहयोग की अपील की।
उन्होंने बताया कि शीतकालीन पूजा स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, महाआरती, धार्मिक अनुष्ठान एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से यात्रा को और अधिक भव्य, आध्यात्मिक एवं आकर्षक रूप दिया जा रहा है।

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