पलायन ने तोड़ दी पुश्तों पुरानी जजमानी व्यवस्था, तर्पण के लिए ऋषिकेश से बुलाने पड़ रहे वेदपाठी
श्राद्ध पक्ष में गायब हुए कौवे,
यमकेश्वर
पहाड़ों से पलायन का सबसे बड़ा असर अब आस्था और परंपराओं पर दिखने लगा है। पितृपक्ष चल रहा है, लेकिन यमकेश्वर विकासखंड के दर्जनों गांवों में श्राद्ध के लिए कौवे तक नहीं दिख रहे। पिछले 4-5 वर्षों से यह स्थिति और गंभीर हो गई है।
श्राद्ध में कौवे को पितरों का रूप मानकर भोग लगाया जाता है, लेकिन गांवों में ही लोग नहीं बचे तो कौवे कहां से आएंगे। गुलदार के बढ़ते आतंक ने कुत्तों की संख्या सीमित रह गई है। पितृ पक्ष में गाय,कुत्ता एवं कौवे को भोग लगाने का विशेष महत्व है लेकिन कई गांवों में अब न गाय बची है न कुत्ता बचा है कौवे भी नजर नहीं आते।
स्थानीय पंडितों ने बताया कि गांवों में गिनती के परिवार ही रह गए हैं। उनके अधिकांश यजमान अब चंडीगढ़, दिल्ली, फरीदाबाद, यमुनानगर, करनाल, लुधियाना, देहरादून, ऋषिकेश और कोटद्वार में बस गए हैं।
जब यजमान ही गांव में नहीं रहे, तो जजमानी से घर कैसे चले। मजबूरी में पंडित जी को भी विवाह,मुंडन,कथा,श्राद्ध पक्ष या अन्य आयोजनों पर अपने जजमानों के पीछे शहरों की ओर पलायन करना पड़ा।
एक पंडित जी ने बताया पहले पितृपक्ष में गांव-गांव जाकर तर्पण कराते थे, अब पितृपक्ष में यजमानों के बुलावे पर हमें ही चंडीगढ़-दिल्ली-ऋषिकेश जाना पड़ता है। यह हमारी मजबूरी बन गई है।
कई गांवों में स्थिति यह है कि जो 2-4 परिवार अभी भी गांव में बचे हैं, उन्हें पितृ तर्पण, तेरहवीं, बरसी और श्राद्ध कर्म के लिए ऋषिकेश से वेदपाठी ब्राह्मणों को बुलाना पड़ रहा है। क्योंकि स्थानीय पंडित भी पलायन कर चुके हैं और पितृ कार्यों जैसे नारायण बलि, तेरहवीं, बरसी, श्राद्ध आदि कार्यों में 3 या इस से अधिक ब्राह्मणों की आवश्यकता पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि पलायन ने सिर्फ घर खाली नहीं किए, बल्कि सदियों पुरानी जजमान-पुरोहित की परंपरा को भी खत्म कर दिया है। गांव के कुल पुरोहित को प्रत्येक परिवार के वंशज की पूरी जानकारी होती थी लेकिन पलायन के कारण सब खत्म हो गया है।
अगर समय रहते पलायन नहीं रोका गया, तो आने वाले कुछ सालों में गांवों में श्राद्ध करने वाला भी कोई नहीं बचेगा।
पहाड़ी इलाकों में कौवों की संख्या कम होना बदलता पर्यावरण भी कारण है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार कम होती खेती से पक्षी जमीन पर दाना एवं भोजन ढूंढने में असमर्थ हैं ऐसे में इनकी संख्या घटना एवं इनका प्रवास करना भी कोवा न दिखना एक कारण है
डॉ योगेश कुमार शर्मा प्राचार्य गुरु गोरखनाथ महाविद्यालय बिथ्याणी

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